जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम का शुभारंभ

20 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री नीतीश कुमार ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए फसल चक्र में बदलाव करना होगा। जलवायु परिवर्तन को देखते हुए यह बदलाव आवश्यक हो गया है। इससे एक तरफ किसानों की आमदनी बढ़ेगी तो दूसरी ओर फसल का नुकसान भी रुकेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 से ही यह बात मेरे दिमाग में थी। मुझे खुशी है कि आज यह शुरू हो रहा है। इस कार्य में जितनी राशि की जरूरत होगी, राज्य सरकार देगी।


 श्री नीतीश कुमार ने कहा कि पहले बिहार में 15 जून से ही मानसून की शुरुआत हो जाती थी पर अब इसमें विलंब होता है। बिहार में पहले ज्यादातर धान और गेहूं की ही बुआई हुआ करती थी लेकिन पर्यावरण में बदलाव के कारण अब 10 प्रतिशत क्षेत्र में मक्के की बुआई की जा रही है। बारिश की कमी से धान की समय पर बुआई में समस्या आती है। जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत चिह्नित किया जाएगा कि मौसम के अनुरूप किस प्रकार से किन-किन फसलों की खेती की जाए। 


श्री नीतीश कुमार ने कहा कि शुरुआत में राज्य के आठ जिलों - मधुबनी, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर, नवादा, गया और नालंदा - के पांच-पांच अर्थात कुल 40 गांवों में फसल चक्र बदलने की शुरुआत हो रही है। बाद में पूरे बिहार में यह लागू होगा। मुझे पक्का विश्वास है कि जलवायु के अनुकूल फसल लगाने से किसानों को बेहतर लाभ मिलेगा। जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम का कार्यान्वयन चार संस्थान - बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा, समस्तीपुर), बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर, भागलपुर) तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (पूर्वी क्षेत्र, पटना) मिलकर करेंगे।

Magazine

Facebook

Janata Dal United

आप जनता दल यूनाइटेड के आधिकारिक वेब पोर्टल पर हैं। आप चाहें तो हमसे संवाद भी करें। सुझाव हों, तो जरूर दें, हम स्वागत करेंगे।       संवाद

Contact Us

149, MLA Flat, Virchand Patel Path
Patna-800001
jdumedia@gmail.com

Follow Us

Janata Dal United